कर्म करते हुए ही हम बहुत कुछ सीख जाते हैं।
मनुष्य के जीवन में सीखना अपनी मां की कोख से ही शुरू हो जाता है । जैसे-जैसे वह बढ़ता है, उसकी मानसिक ,बौद्धिक विकास और शारीरिक विकास होना आरंभ हो जाता है । संसार में आते ही वह सर्वप्रथम अपनी मां से सीखना आरंभ करता है। जीवन एक संघर्ष है और संघर्ष करते रहना मनुष्य का कर्तव्य है । हर पल हमें जीवन रूपी पाठशाला से कुछ ना कुछ सीखने को मिलता ही रहता है यदि हम सीखना बंद कर देंगे तो जीवन रूपी पाठशाला से काफी पिछड़ जाएंगे और मनुष्य ने तो हमेशा आगे बढ़ना ही सीखा है।
दिन की शुरुआत सूरज की पहली किरण से होती है तो मनुष्य के जीवन की शुरुआत कुछ सीखने से ही करता है जीवन एक बहती नदी है जो अपनी निर्मलता, स्वच्छता और पवित्रता से आगे बढ़ती हुई अपनी कठिनाइयों का सामना करती हुई अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाती है और सागर में मिलकर विशाल बन जाती है। जल की धारा हमें कुछ ना कुछ सिखाती ही रहती है कि हमें जीवन में हमेशा सीखते ही रहना चाहिए । यदि नदी का पानी कहीं रुक जाए तो वह गंदला सा पड़ जाता है । उसी प्रकार मनुष्य जब सीखना बंद कर दे, तो उसका जीवन मृत्यु के समान हो जाता है।
सीखने के लिए मनुष्य को कुछ इच्छाओं का त्याग भी करना पड़ता है ।सीखते समय " सुनो अधिक और बोलो कम " । जब भी हम कुछ सीखें ,तो सिखाने वाले का आदर करना हमारी शिष्टता का परिचय करवाता है ।
वक्त हमें बहुत कुछ सिखाता है कभी हमें जीवन में यह सफलता भी दिखलाता है तो कभी असफलता भी। असफलता के कारण हम अपने जीवन में कई बार हार जाते हैं और कई बार उस असफलता से बहुत कुछ सीख जाते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं । उस मंजिल को प्राप्त कर सकते है जिसके लिए हम निरंतर कार्यरत है। मनुष्य के जीवन में सीखना हर वक्त महत्वपूर्ण है । मनुष्य अपने जीवन के प्रथम क्षण से अंतिम क्षण तक सीखता ही रहता है।
हम जो कुछ भी सीखते हैं वह हम अनुभव द्वारा ही सीखते हैं। कोई उम्र या समय सीखने के रास्ते में रुकावट नहीं होता ।
(मेरे अनुसार)
लिखना -पढ़ना सीखने लगे हैं जब से हम,
ऊंचाइयों को छूने लगे हैं तब से हम।
सोचा है मैंने जिस ने सिखाया मुझे ।।
विनम्र हो शीश झुकाऊं उसे ।
अहंकार छूने न पाए कभी ।
कुछ नया कर दिखलाएं अभी।।
By: Ms. Poonam
Very 👍👏😊
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