जिंदगी...... जिंदगी है एक अनमोल हीरा ,कभी है चमकता तू कभी है कोयला ,अगर हीरे की तरह है खुद को चमकाना मुश्किलों से कभी नहीं घबराना ,कर खत्म अपने अस्तित्व को मिट्टी की तरह अगर पक्का गढ़ा है बनाना । दीये की तरह खुद को जलाना सीख ,अगर जहान को रोशन है करना ,जीवन पथ पर मिलेंगे कष्ट लाखों, उनसे डर पीछे नहीं हटना, जिंदगी दूसरा नाम है संघर्ष का , फिर भी जीवन के लक्ष्यों को पूरा है करना, । कभी है रोना तो कभी है हंसना , सिलसिला जिंदगी का ऐसे ही चलना पर कर संघर्ष नाम रोशन कर ले जहान में ,क्योंकि यह जीवन एक बार ही है मिलना।
By: Ms. Meena Sharma
Gud
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ReplyDeleteWhat a great poem I love this poem the author of this poem is a great philosopher
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