Monday, May 24, 2021

उदास न हो


 मेरे नदीम मेरे हमसफर , उदास न हो ।
 कठिन सही तेरी मंज़िल , मगर उदास न हो | 
कदम कदम पे चट्टानें खड़ी रहें , 
लेकिन जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते । हवाएँ कितना भी टकराएँ आंधियाँ बनकर ,
 मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकते । 
मेरे नदीम मेरे हमसफर ...
 हर एक तलाश के रस्ते में मुश्किलें हैं ,
 मगर हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती है । 
हज़ारों चांद सितारों का खून होता है 
तब एक सुबह फिज़ाओं पे मुस्कुराती है । 
मेरे नदीम मेरे हमसफर जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
 वो ज़िन्दगी में नया रंग ला नहीं सकते ।
 जो रास्ते के अन्धेरों से हार जाते हैं 
वो मंज़िलों के उजालों को पा नहीं सकते ।
 मेरे नदीम मेरे हमसफर , उदास न हो | 
कठिन सही तेरी मंज़िल , मगर उदास न हो ।


     कामनी

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