मेरे नदीम मेरे हमसफर , उदास न हो ।
कठिन सही तेरी मंज़िल , मगर उदास न हो |
कदम कदम पे चट्टानें खड़ी रहें ,
लेकिन जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते । हवाएँ कितना भी टकराएँ आंधियाँ बनकर ,
मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकते ।
मेरे नदीम मेरे हमसफर ...
हर एक तलाश के रस्ते में मुश्किलें हैं ,
मगर हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती है ।
हज़ारों चांद सितारों का खून होता है
तब एक सुबह फिज़ाओं पे मुस्कुराती है ।
मेरे नदीम मेरे हमसफर जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो ज़िन्दगी में नया रंग ला नहीं सकते ।
जो रास्ते के अन्धेरों से हार जाते हैं
वो मंज़िलों के उजालों को पा नहीं सकते ।
मेरे नदीम मेरे हमसफर , उदास न हो |
कठिन सही तेरी मंज़िल , मगर उदास न हो ।
कामनी
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