Wednesday, May 26, 2021

कविता: हर मां के नाम

घुटनों से रेंगते- रेंगते
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छांव  में
जाने कब खड़ा हुआ,
काला टीका दूध मलाई
आज ही सब कुछ वैसा है,
मैं ही मैं हूं हर जगह
प्यार यह तेरा कैसा है?
सीधा -साधा,भोला -भाला
मैं ही सबसे अच्छा हूं,
कितना भी हो जाऊं बड़ा,
" मां"! मैं आज भी तेरा बच्चा हूं l


रूबी रतन

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