Tuesday, August 11, 2020

हिंदी की व्यथा


 कल रात हिंदी मेरे सपने में आई थी ,

 उसके मुख मंडल पर उदासी सी छाई थी,

 मैंने कहा तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए ,

 सितंबर का महीना जो रहा है ,

 प्रतियोगिताएं होंगी ,  कवि सम्मेलन होंगे

 पूरा एक पखवाड़ा मनाया जाएगा,

 अखबारों के मुखपृष्ठ पर सचित्र कॉलम आएगा

 हिंदी मुझसे बोली बड़ी करुण है मेरी कथा ,

 सुन सकोगे मेरी व्यथा, 

 पिछले पचास वर्षों से संघर्ष कर रही हूंँ ,

अपने ही घर में अपने अस्तित्व की  ,

 लड़ाई विदेश से लड़ रही हूंँ

 मैं तो यह सोच कर भी डरती हूंँ 

बस मन ही मन सिसकियां  भरती हूंँ ,

 कि कल से फिर भुला दी जाऊंगी ,

पूरे  एक वर्ष बाद याद आऊंगी

BY: MS. ANURADHA

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