कल रात हिंदी मेरे सपने में आई थी ,
उसके मुख मंडल पर उदासी सी छाई थी,
मैंने कहा तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए ,
सितंबर का महीना जो आ रहा है ,
प्रतियोगिताएं होंगी ,
कवि सम्मेलन होंगे ।
पूरा एक पखवाड़ा मनाया जाएगा,
अखबारों के मुखपृष्ठ पर सचित्र कॉलम आएगा ।
हिंदी मुझसे बोली बड़ी करुण है मेरी कथा ,
सुन सकोगे मेरी व्यथा,
पिछले पचास वर्षों से संघर्ष कर रही हूंँ ,
अपने ही घर में अपने अस्तित्व की ,
लड़ाई विदेश से लड़ रही हूंँ
मैं तो यह सोच कर भी डरती हूंँ
बस मन ही मन सिसकियां भरती हूंँ ,
कि कल से फिर भुला दी जाऊंगी ,
पूरे एक वर्ष बाद याद आऊंगी ।
BY: MS. ANURADHA

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