Thursday, November 19, 2020

औरत


 छुट्टी तो आती है पर कोई आराम नहीं आता,

 क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नहीं आता ।

देखो देखो सुबह हो गई सरपट सरपट भाग रही ,

सब तेरा ही है पगली यह सोचकर नाच रही।

 फिर भी कोई चूक हुई तो सुनती काम नहीं आता ,

क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नहीं आता ।

एक अकेली नार  यहां पर जाने क्या-क्या काम करें ,

उसका कुछ भुगतान करें तो शायद तुम को पता चले ।

घर की स्त्री को साहब कोई व्यापार नहीं आता,

 क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नहीं आता ।

 सोती है वह आखिर में और सबसे पहले जागती है,

 होती है वह पीड़ा में फिर भी देखो हंसती है। 

 उसकी इच्छाओं का क्यों तुमको ध्यान नहीं आता ,

क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नहीं आता ।
             
                          कामनी

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