Monday, May 31, 2021

इन खामोश वादियों में


 इन खामोश वादियों में, यह दिल करता है पुकार,

 हो गया है इन आँखों को, बेशकीमती खजाने का दीदार,

मैं पवन का झोंका बन, गोद में इसकी झूम जाऊं,

 बन डाली किसी पेड़ की,परिंदों से मैं भर जाऊं,

बन किरण सूर्य की, धरती पर बिखर जाऊं,

 एक बूंद शबनम की,फूलों में झिलमिलाऊँ,

चहकू तो महके उपवन कली - कलो पर ओस  दल,

 मोती बना जड़ लूं आंखों में,  हो ना जाए कहीं ओझल,

है मस्त पवन का पैगाम, इसमें जाऊं मैं समा,

 बन बादल तेरे आंगन का,मस्त लहरों के आंचल में,

 झोली मैं भी लूँ बिखरा ,इसी खुले नभ के तले,

प्रकृति प्रेम लूं ह्रदय में बसा, तू है समाई जिंदा कलाकार


  मैं आनंद लूँ खामोशी का,
तेरे आंचल में ही बहार,
 इन खामोश वादियों में,
यह दिल करता है पुकार……………….

अनुराधा

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