आज प्रत्येक व्यक्ति शिखर पर पहुंचना चाहता है औ। अपितु शिखर पर पहुंचने हेतु एक कठिन प्रक्रिया से गुजरना होता है।
विजय होने से पूर्व विजय होने की दृढ़ता मस्तिष्क में होना आवश्यक है। एक खिलाड़ी विजय तत्काल ही हो जाता है जब वह विजय होने के संकल्प ग्रहण करता है। इसके अतिरिक्त विजय होने तक उसका कठिन परिश्रम , लगन और समय एक प्रक्रिया है।
एक 13 वर्ष का बालक दृढ़ संकल्प कर चुका था कि वह एक महान खिलाड़ी बनेगा। इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उसे 35 वर्ष कठिन संघर्ष ,कठिन समय और कठिन परिश्रम से गुजरना पड़ा। आज के समय में वह महान खिलाड़ी और कोई नहीं सचिन तेंदुलकर के नाम से जाना जाता है ।
उनकी यह सोच 13 वर्ष की आयु मैं बन चुकी थी।
एक महान वैज्ञानिक ने अपने मस्तिष्क में दृढ़ संकल्प लिया कि वह बल्ब का आविष्कार करेगा। उसका 999 अविष्कार के प्रयोगों मे असफल होना एक प्रक्रिया थी। वह उस महान वैज्ञानिक का नाम Thomas Edison था।
एक महान व्यक्ति्ति बननेे हेतु एक महान और दृढ़़ सोच का होना जरूरी है। यदि व्यक्ति अपने मन में दृढ़ संकल्प कर ले कि उसे जीवन में ऊंचाइयों को स्पर्श करना है तो वह ही अवश्य शिखर पर मिलता है।
By: Ms. Poonam Kaur
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